loksangharsha

जनसंघर्ष को समर्पित

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नए नरसंहार की तैयारी

Posted On: 3 Sep, 2016  
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हिन्दुवत्व वादी राष्ट्र देश के लिए खतरा

Posted On: 3 Sep, 2016  
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मोदी ! अमेरिकी लड्डू खायेंगे

Posted On: 3 Sep, 2016  
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मोदी सरकार-मजदूर विरोधी सरकार

Posted On: 3 Sep, 2016  
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किसान सब्सिडी देता है

Posted On: 22 Aug, 2016  
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कफस नहीं है कश्मीर

Posted On: 22 Aug, 2016  
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Hindi News Hindi Sahitya social issues में

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आखिर ये तन खाक मिलेगा

Posted On: 7 Jan, 2015  
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मोदी युग की पहली कविता ———–

Posted On: 31 Jul, 2014  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

भाजपा या संघ राम मंदिर मुद्दे को उठाहती है तो वोट की राजनीती करती है लेकिन राम लाला तम्बू में पड़े हुए है वर्षो से कोई भी अन्य राजनितिक दल आगे क्यों नहीं आया .. आज विश्व हिन्दू परिषद् के वर्षो की लड़ाई से आधी जीत हासिल हुई है कभी आप लोगो ने अन्य राजनितिक दलों को यह मुद्दा उठाते देखा है क्या ? क्या राम लला का इस प्रकार आप को टाट में पड़ा रहना अच्छा लगता है . मर्यादा पुर्शोतम राम का भव्य मंदिर उनके जन्म स्थान पर बने इसके लिए हमारे लाखो पूर्वज सहीद हो गए लेकिन किसी ने आगे बढ़ कर मंदिर बनवाने की नहीं सोची ये कम से कम सोच रहे है ? संघ ना हो तो घर से निकलना मुस्किल हो जायेगा . जैसी हालत कश्मीर की है पुरे हिंदुस्तान का होगा और आप को राजनीती लग रही है कहेंगे चुनाव के समय ही क्यों याद आता है तो जान ले वर्ष भर कार्यक्रम होता है मीडिया प्रमुखता नहीं देती चुनाव के समय कुछ अधिक देती है इसलिए आप जैसे लोगो को यह चुनावी राजनीती लगती है ..........जय श्री राम

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

आरएसएस के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख राम माधव ने कहा कि प्रदेश सरकार सिर्फ एक वर्ग के वोट के लिए हिंदू धर्म और संस्कृति पर लगातार हमला कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सत्ता के नशे में पाबंदी लगाकर बहुसंख्यक समाज की भावनाओं को कुचलने का काम किया है। संत-महात्माओं को अगर परिक्रमा करने से रोका गया, तो सरकार का सत्तामद चकनाचूर हो जाएगा। आर एस एस का हिन्दू धर्म संस्कृति से कोई लेना देना नहीं है सिर्फ धर्म के आधार पर जितना भी उपद्रव हो सके करना ही उसका काम है. आर एस एस का राजनितिक चेहरा भाजपा के रूप में मौजूद है तो उसको मुखौटा उतारकर सीधे सीधे राजनीती की बात करनी चाहिए और हिन्दू धर्म व संस्कृति को बदनाम करने का कार्य बंद कर देना चहिय सही कहा ! f

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

इमरान साहब, एवं जलालुद्दीन भाई, आपने वही सब लिखा जो आपने पढ़ा या सरकार ने दिखाया, वास्तव मैं हमारी कांग्रेस सरकार किसी भी तरीके से आर एस एस को बैन करना चाहती है इसीलिए उसने मुद्दे को भटका कर ये हिन्दू आतंकवाद का नया राग अलापना शुरू किया है. ये एक मजेदार तथ्य है की वही जांच एजेंसियां पहले बम विस्फोटों में सिमी और लश्कर का हाथ बतातीं हैं और दर्जन भर लोगों को गिरफ्तार भी करतीं हैं, सर्वविदित है की लश्कर आतंकी " नागौरी " ने नारको टेस्ट में इन बम विस्फोटों में संलिप्त होने की बात स्वीकार की, लेकिन क्योंकि हमारी कांग्रेस् नीट सरकार जबरदस्ती आर एस एस को इसमें घसीटना चाहती है इसलिए पहले तो उन्होंने हिन्दू आतंकवाद का राग अलापना शुरू किया फिर जबरदस्ती उन लोगों को जो मुस्लिम समुदाय को आर एस एस के विषय में फैली भ्रांतियों के विषय में बताकर उनहे आर एस एस से जोड़ने का काम कर रहे थे, क्योंकि वही लोग कांग्रेस के लिए ज्यादा खतरा हैं को नित नए आरोप लगा कर गिरफ्तार करा दिया जिस से उनके द्वारा जोड़े गए मुस्लिम समुदाय के लोगों को लगे की ये गलत थे और उन्हें धोखा दे रहे थे, अमेरिका द्वारा गिरफ्तार आतंकी हेडली ने भी उक्त बम विस्फोटों में लश्कर के शामिल होने की बात स्वीकार की, लेकिन भारत सरकार ने ऐसे महत्वपूर्ण व्यक्ति के न तो प्रत्यर्पण का प्रयास किया और न ही अमेरिकी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर क्योंकि हमारी सरकार को तो हिन्दुओं को आतंकी साबित करके आर एस एस को बैन करना है ताकि उसकी अपनी राजनैतिक गोटियाँ फिट होती रहें और मुसलमान बेवकूफ बनते रहें.......! ये बात आज तक समझ नहीं आई की मुसलमान क्यों इतनी आसानी से बेवकूफ बन जाते हैं चाहे वो पढ़े लिखे हों या अनपढ़ ........! अब जैसे आपने ही बिना सभी तथ्यों पर गौर किये न ही आर एस एस का रिकार्ड चैक किये बस लिख दिया की बैन करो.....! यदि आप जरा भी राष्ट्रवाद के समर्थक हैं तो आर एस एस को तो बैन करने की सोच ही नहीं सकते ....... क्योंकि उससे बड़ा राष्ट्रवादी संगठन विश्व में कोई नहीं है....... यकीन न आये तो अपने बच्चों को आर एस एस नीत स्कूलों में भेज कर देखो अन्य स्कूलों, मदरसों, सरकारी स्कूलों और इनका अंतर आपकी समझ आ जाएगा कही सुनी बातों से अच्छा होता है स्वयं प्रयोग करना ....... ! आपको ये जानकार शायद आश्चर्य होगा की हमारे शहर में कुछ मुसलमान लोग भी आर एस एस की शाखा में जाते हैं और कुछ बुजुर्ग भी जुड़े हुए हैं .........! तो क्या आप उनको भी आर एस एस के कार्यकर्ता मानकर जेल में डालने की वकालत करेंगे . कृपया सुनी सुनाई बातों पर विशवास न करें, स्वयं जानें आर एस एस क्या है यकीन मानिए सच जानने के बाद आप भी शाखा में पहुँच जायेंगे. जिन लोगों की गिरफ्तारी की आपने बात की है उनमें से किसी के भी खिलाफ कोई सबूत अभी तक जांच एजेंसियों के पास नहीं है केवल एक मोटर साइकिल है जिस पर बम फटा था ये भी नहीं कह सकते की उस पर किसी ने रख दिया था या उसमें फिट था, और वो मोटर साइकिल साध्वी प्रज्ञा के नाम थी.......! अब इतने मूर्ख तो आप भी नहीं होंगे की अपनी ही मोटर साइकिल पर खुद ही बम फिट कर दें, जबकि साध्वी प्रज्ञा का कहना है की वो मोटर साइकिल उन्होंने बेच दी थी, ....! इस सम्बन्ध में साध्वी प्रज्ञा ने राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा है जिसे पंजाब केसरी समाचार पत्र में प्रमुखता से छापा गया लेकिन इलेक्ट्रोनिक मिडिया ने कोई तवज्जो नहीं दी क्योंकि खबर मसालेदार नहीं थी.......आगे आप स्वयं समझदार हैं

के द्वारा: munish munish

आई.जी सहब आप आए.जी. है तो हम है कलेक्टर । आपके लिये कुछ प्रतिक्रिया कलेक्ट की है । . विवेक कुमार लिखते है ।--------------------------------- श्रीमान रघुवीर सिंह जी....आपका ये दिशाहीन ब्लॉग हमारी समझ के बाहर है.....आप क्या लिखना चाहते हैं या क्या बोलना....कहने को तो मे भी कह सकता हून...की एस एम मुशरिफ़ पूर्व आई जी पुलिस महाराष्ट्रा खुद की किसी व्यक्तिगत रंजिस से ये ब्‍लॉग लिखते हैं आप जैसे कॉपी पेस्ट व्यक्ति उसको कॉपी पेस्ट कर देते हैं...शर्म आनी चाहिए आप जैसे ब्लॉंगर्स को....और शर्म आनी चाहिए ऐसे पुलिस ऑफिसर्स को जो व्यक्तिगत विचारों को धर्म और संप्रदाय से जोड़ कर अपना मतलब निकालते हैं. . राज शर्मा लिखते है ।-------------------------------- सुमन सर, पिछले 60 वर्षो के कांग्रेसी शासन मे आर एस एस वाले इतने महत्वपूर्ण पदो पर कैसे पहुच गये!!!!!!! समझदार को इशारा ही काफ़ी. अगर नही समझे तो, बताइए, विस्तार से समझने वेल कई मिल जाएँगे. . भाई हरिश केहता है ------------------------------------ सुमन साहब आपकेबिचार पड़ कर बड़ा दुख हुअ.जो संगठन देश के लिए कश्मीर मे आतंकवादियो के बीच कार्य करके अपने जान देने को तैयार है,जो रास्टर्बीरोधी ताकत के बीच उनकी गतिबिधियो से सरकार को अवगत कराता है,जो किसी पर्सनल लाभ के ईमानदारी के साथ केवल अपने बेतन पर देश की सुरक्षा के लए तत्पर है उस को आप राजनीति मे लपेट रहे है.शर्म आनी चाहिए आपको. . हम केहते है ----------------------- कुछ भी केहना अपनी जबान खराब करना है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

हांलाकि मैं ३० नवम्बर तक के लिए किसी ब्लॉग को लिखने और टिपण्णी करने से अपने आपको प्रतिबंधित कर लिया था परन्तु आज के जवलंत विषय पर आपकी ओर (जागरण टीम) “क्या अन्ना हमारे दौर के गांधी हैं ?” विषय पर विचार आमंत्रित करने के कारण मैं अपने आपको नहीं रोक पाया ; इस विषय पर मेरे अपने कुछ विचार है : प्रथम तो यह की अन्ना की तुलना गाँधी से करना नितांत बच्चों जैसा प्रशन है, गाँधी जी ने भारतीय ही नहीं अफ्रीकियों की दयनीय स्तिथि से विचलित होकर कुछ सामाजिक जाग्रति पैदा करने की ठानी थी जब याता- यात और संचार माध्यमो का आभाव था और उस पर सरकारी नियंत्रण था और वह एक पढ़े लिखे समझदार व्यक्ति थे कानून के ज्ञाता थे किसी भी आन्दोलन को करने और सम्हालने की कुव्वत रखते थे उनका सबसे बड़ा हथियार अंहिसा ही था जो उनकी अपनी थ्योरी पर आधारित था कि केवल भारत में राज करने वाले ३५ हजार अंग्रेजों को ३५ करोड़ भारतीय अगर लात -घूंसों से मारेंगे तो वह मर जायंगे इस लिए हथियारों कि कोई आवश्यकता नहीं है आजादी कि लड़ाई लड़ने के लिए ? इस कारण भारत का प्रत्येक नागरिक उनके साथ था ? दूसरी यह कि अन्ना हजारे कि शिक्षा के विषय क्या कहना सब जानते हैं लेकिन उनका साधारण रहन सहन एवं सामाजिक ज्ञान अवश्य तारीफ के काबिल है परन्तु कानूनी ज्ञान के लिए वह दो वकील बाप बेटों एवं असंतुष्ट ग्रुप के रिटायर्ड अधिकारीयों पर निर्भर है जिनकी सोच सामाजिक सरोकार न होकर सरकार का विरोध करने जैसा लगता है – जिसमे वह अपनी अपनी छवि चमकाने में अधिक उपयोग कर रहे हैं ? इस लिए भी गांधीजी से तुलना किसी भी प्रकार से नहीं कि जाती गाँधी जी आन्दोलन को अपने हाथ में लेकर चलते थे जनता उनके पीछे चलती थी यहाँ उल्टा है कथित स्वयंभू सिविल सोसाइटी के करता धर्ताओं ने एक सीधे सादे इंसान में हवा भर कर एक अनजाने से स्थान से उठा कर दिल्ली के जंतर मंतर पर बैठा कर अपने हित साधने में आज उनकी जान भी लेने में कोई संकोच नहीं कर रहे हैं ? एक बार को यह भी मान लिया जाये कि यह सब आन्दोलन जनता कि भलाई के नाम पर किया जा रहा है पर जिनके खिलाफ किया जा रहा है वह भी तो भारतीय जनता ही है ? यह आन्दोलन जिन सरकारी कर्मचारियों अधिकारीयों के खिलाफ है तो क्या उनमे बहुसंख्य दलित और पिछड़ा वर्ग नहीं है तो क्या यह माना जाय कि लोकपाल बिल में निचले स्तर के कर्मचारियों और अधिकारीयों को शामिल करने के मांग क्या दलित और पिछड़ा वर्ग के विरुद्ध नहीं है ? तीसरा यह कि क्या कथित सिविल सोसाइटी में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो अन्ना हजारे के साथ एक दिन या फिर क्रमिक अनशन (भूख हड़ताल ) बैठने लायक कुव्वत रखता हो – इस इन्टरनेट के युग में फेश बुक /ट्विटर या फिर मोबाईल एस एम् एस द्वारा लोगों को जोड़ने और उनको सभी सुविधा देकर धरना स्थल पर लाना भी अपने आप में एक सवाल खड़ा करता है ? चौथा और सबसे बड़ा कारण यह कि भारत के लोगों कि याददास्त जरा कमजोर ही है अगर ऐसा न होता तो इस देश में आपातकाल के बाद कांग्रेस के पतन के बाद कांग्रेस का नाम लेने वाला कोई भी नहीं होता ? क्या ऐसा संभव नहीं था परन्तु इस देश के दूसरी श्रेणी के नेताओं में वह कुव्वत ही नहीं थी जिस कारण कांग्रेस दुबारा से जिन्दा हो गई और जनता अपने आपको ठगा सा महसूश करने लगी ? और ऐसा भी नहीं है कि १९७४ के श्री जय प्रकाश नारायण के आन्दोलन से कोई नेता नहीं उपजा था बहुत से नेता बने पर उनका चरित्र सबके सामने है ? गाँधी के दर्शन में हिन्दू मुश्लिम सिख इसाई सब सामान थे और सभी आन्दोलन में शामिल थे लेकिन यहाँ उल्टा है न तो मुस्लिम है न सिख है और न ही दलित ही है तो फिर पुरे भारत का दावा कैसा इसाई का सवाल ही पैदा नहीं होता ? पांचवा और आखिरी कारण यह कि आज विरोधी पार्टी जो ७ वर्षो तक सत्ता का स्वाद चख चुकी और उसके सत्ता के भागिदार यह कतई बर्दास्त करने के मूड में नहीं है कि उनको राज करना नहीं आता या जनता ने उन्हें २००४ में ख़ारिज कर दिया था – यही नहीं उनका मात्र-पितृ संघटन जो कि अपने आपको सांस्कृतिक संघटन कहते थकता नहीं उसके पदाधिकारी भारतीय जनता पार्टी में आते जाते रहते है यहाँ तक कि मुख्या मंत्री भी बनते है यही कारण है कि अन्ना के इस आन्दोलन को संघटन ने हाइजैक कर लिया है और चेहरा तो अन्ना का ही है लेकिन दिमाग किसीतीसरे का ही चलता है (यहाँ कथित सिविल सोसाइटी ) कि भी चलने नहीं देते ? इस लिए श्री श्री अन्ना हजारे कि तुलना गाँधी से करना बिलकुल ही गलत है, हाँ गाँधी का अनुसरण करने वाला तो कोई भी हो सकता है परन्तु गाँधी जैसा कोई न तो पहले हुआ है और न ही कोई आगे पैदा हो सकता है ? यही कारण है कि कुछ लाख लोगो कि भीड़ जुटा लेने से कोई भारत के १२१ करोड़ जनता का प्रतिनिधि होने का दावा तो कर सकता है पर हो नही सकता – ऐसा ही दावा बाबा राम देव ने भी किया था जो यह कहते नहीं थकते थे कि वह १२१ करोड़ जनता के प्रतिनिधि है परन्तु आज केवल नगद दो ही है एक राम देव दुसरे बाल कृषण जिनको अपने लगी को छुडाने में पशीना आ रहा है ? इश्वर अन्ना हजारे की रक्षा करे इस चौकड़ी से ? सिंह एस. पी. मेरठ

के द्वारा:

भाई अनिल जी आप अन्धो के शहर में चश्मा बांटने का कार्य कर रहे हो बधाई स्वीकार करें. फिर भी एक कहावत है की बारिश के दिनों में एक बेचारा जानवर बहुत खाने के बाद भी कमजोर पतला दुबला ही रहता है क्योंकि जब वह जंगल में देखता है की चारों ओर हरियाली ही हरियाली ही दिख रही है तो वह समझता है की आज तो उसने कुछ खाया ही नहीं ? हमारी जनता का भी यही हाल आज सारा भारत जैसे अन्ना मय हो गया है और इसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं है जो लोग सारे दफ्तरों में बैठ कर रिश्वत लेते हैं साम को बच्चों को लेकर अन्ना के दरबार में पहुँच जाते है ईमानदार बनाने के लिए - वैसे भी अभी ताजा समाचार है की आदरणीय स्वामी अग्निवेश जी के मतभेद अन्ना की टीम के सदस्यों के साथ हो गए है यह बात आपके कथन को सही साबित करता है की इस आन्दोलन की डोर कही और से चलाई जा रही है ? इस विषय में मेरे कमेंट्स भी है :

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ई सिद्धांतकार साहेब आजतक कउन सा सिद्धांत बनाये हैं, किसी को पता हो तो तनी हमहूँ को बता देना. इनका ये लेख फिक्सन (कल्प कथा ) ये ज्यादा कुछ नही लग रहा । हिटलर,अमेरिका,RSS,BJP (इटली नहीं हाहाहाहाा) से इस आन्दोलन का कनेक्शन जोड़ गये। सुप्रसिद्ध लेखक चिन्तक व सिद्धांतकार महोदय ….. 1. 40 साल से लोकपाल संसदीय प्रणाली से पारित हो ही रहा था, और कितना टाइम चाहिये साहेब? 2.क्या अन्ना जी का ये पहला आन्दोलन है ? (जानकारी नहीं है या उसका उल्लेख करने से ये लेख कमजोर पड़ जाता) 3.क्या अन्ना जी ही सारे मुद्दे उठायेंगे, और वो भी सभी एक साथ ही? 4.क्या अन्ना जी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे के बाद और कोई मुद्दा न उठाने की बात कही है या इसके बाद किसानों की भूमि अधिग्रहण आदि मामलों पर भी कुछ सोंचा है? (नही पता तो अबोध बालकों से पूछ लें) 5.मजदूरों,कर्मचारियों,विद्धार्थियों,वकीलों,किसानों,टैक्सी चालकों ,हि्दुओं,मुसलमानों आदि आदि किसकी शिरकत आपको नही दिखाई दे रही है? बहुत लिख दिया बाकी आपकी प्रतिक्रिया पर……!

के द्वारा: ajaysingh ajaysingh

 ई  सिद्धांतकार साहेब आजतक कउन सा  सिद्धांत बनाये हैं, किसी को पता हो तो तनी हमहूँ को बता देना.    इनका ये लेख फिक्सन (कल्प कथा ) ये ज्यादा कुछ नही लग रहा । हिटलर,अमेरिका,RSS,BJP (इटली नहीं हाहाहाहाा) से इस आन्दोलन का कनेक्शन जोड़ गये। सुप्रसिद्ध लेखक चिन्तक व सिद्धांतकार महोदय ..... 1. 40 साल से लोकपाल संसदीय प्रणाली से पारित हो ही रहा था, और कितना टाइम चाहिये साहेब? 2.क्या अन्ना जी का ये पहला आन्दोलन है ? (जानकारी नहीं है या उसका उल्लेख करने से ये लेख कमजोर पड़ जाता) 3.क्या अन्ना जी  ही सारे मुद्दे उठायेंगे, और वो भी सभी एक साथ ही? 4.क्या अन्ना जी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे के बाद और कोई मुद्दा न उठाने की बात कही है  या इसके बाद किसानों की भूमि अधिग्रहण आदि मामलों पर भी कुछ सोंचा है? (नही पता तो अबोध बालकों से पूछ लें) 5.मजदूरों,कर्मचारियों,विद्धार्थियों,वकीलों,किसानों,टैक्सी चालकों ,हि्दुओं,मुसलमानों   आदि आदि किसकी शिरकत आपको नही दिखाई दे रही है?    बहुत लिख दिया बाकी आपकी प्रतिक्रिया पर......!

के द्वारा: ajaysingh ajaysingh

बालकृष्ण की डिग्रियां फर्जी हैं। उसने फर्जी डेग्री ले के किसके पास नौकरी मान्गी ? किस बोस को ठगा ? आपकी मेडम ज्यादा नही पढी है, देश को ठगा है झुठी डिगरी दिखा के । बालकृष्ण की नागरिकता भी विवाद की नागरिकता विवाद मे है तो आपकी मेडमकी नागरिकता क्या है । विवाद की वजहसे वो प्रधानमन्त्री नही बन पाई, वरना क्या वो मौका चुकती ? आपने उस नाकाम मौके को भी अच्छी तरह भुनाया । आहाहा हमारी मेडम कितना त्यागी है !!! भ्रष्टाचार की गंगोत्री में सुबह और शाम कौन स्नान कर रहे हैं, सब जानते है । तलवे चाटना चटवाना तो आप के लोगोका रिवाज हैना ? बालकृष्ण का आर्थिक अपराध क्या है ? वो बाबा रामदेव को साथ दे रहे है स्विस बेन्क को लूटने की साजिश बनाने मे । लूट का माल तो भारत मे आयेगा । आप स्विट्जरलेन्ड के नागरिक जैसा सोचते है । आपकी फरियाद ये है की भारत के कुछ आर्थिक अपराधी आपके बेन्क लूटने आ रहे है ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

के द्वारा: subhashmittal subhashmittal

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लेख में सिर्फ एक चीज अच्छी लगी जो आपने लिख दिया कि लेखक सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं वर्ना ये पता ही न चल पाता कि सुप्रसिद्ध साहित्यकार अक्सर बिना पढ़ाई किये ही कलम घसीटने लगते हैं| गाँधी जी ने सच ही कहा था 'हिन्दू एक कायर कौम है'| पूरे लेख में सिर्फ दर से कांपती हुई कलम हिलती नज़र आई| 'जिस जुबान में है जुर्रते इज़हार नहीं वो कुछ भी हो मगर साहिबे किरदार नहीं'| कलम सरस्वती का वरदान है गलत मत लिखो वर्ना साथ छोड़ देगी| कायरता से राष्ट्र मजबूत नहीं होगा न मजबूत होगा झूठ बोलने से बाबर के खैरख्वाह तो हिन्दुस्तानी मुसलमान भी नहीं क्योंकि सबको पता है वह आक्रान्ता था फिर उसके नाम पर हम आपसी समरसता क्यों नष्ट करें? तटस्थ हो कर विचार करें अपनों पर आरोप लगा कर नहीं | अपनों की खिलाफत ने २०० वर्षों की गुलामी और बेज्जती के अलावा कुछ नहीं दिया| आज भी कोई हिन्दू अपने कुत्ते का नाम भी विभीषण नहीं रखता| आशा है सत्य और तथ्य पर भी आपकी नज़रें पड़ेंगी| और हाँ पाण्डेय न लिखते तो भी लेख पूरा हो जाता क्यों नाम लिख कर सम्प्रदायवाद को बढ़ावा दे रहे हैं|

के द्वारा: chaatak chaatak

पाण्डेय जी जय श्री राम । क्या आपको पता है कि हिंदू उस जमीन के लिये कब से मुकद्दमा लड़ रहा है । लगभग 125 वर्ष । क्या आपको पता है कि राम मंदिर संघर्ष का इतिहास कितना पुराना है । लगभग 500 वर्ष । राम भारत की संस्कृति की नींव हैं । राम को इस्लाम ने हटाना चाहा, राम को अंग्रेजों ने हटाना चाहा ताकि सनातन धर्म भरभरा कर गिर जाये । कृपया कर इलाहाबाद हाईकोर्ट का पूरा आदेश पढ़ें । और गद्दार कम्युनिस्टों का लिखा इतिहास नहीं असली इतिहास पढ़ने के लिये लाईब्रेरी का चक्कर लगायें । गांधी, पटेल, अंबेडकर ने इस बारे में क्या कहा है । आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि धर्मनिरपेक्षता भारत के संविधान का अंग 1950 में नहीं थी क्योंकि संविधाननिर्मात्रीसभा इसके दूरगामी विध्वंसक प्रभावों को जानती थी । कृपया अपने देश के असली इतिहास और संस्कृति से परिचित होलें । इसके लिये आपको रोमिला थापरों से दूरी बनानी होगी ।

के द्वारा: kmmishra kmmishra

श्रीमान या तो आप व्यस्था से पूरी तरह अनभिज्ञ हैं......... या आपने कुछ धारणा बना ली है,,,,,, विषयो को देखने की....... आप RSS पर आरोप लगते हैं........... की वो राष्ट्रद्रोही हैं....... या वो अपनी राजनैतिक लाभ के लिए भावनाओं का इस्तमाल कर रहे हैं............. हाल ही मैं आये राम मंदिर जन्म भूमि विवाद पर आये फैसले पर RSS ने सुप्रीम कोर्ट जाने का कोई प्रयास नहीं किया....... क्यों,,,,,,? क्या अब इस देश में हिन्दू राजनैतिक लाभ के लिए शेष नहीं है........ ? पर मुस्लिम समुदाय ने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है....... देश आपात स्थिति के लिए तैयार था..... चरों और दहशत का माहौल था की न जाने क्या फैसला आये और उसपर लोग किस तरह प्रतिर्किया दें....... एक फैसला आया जिसने शांति का प्रयास करने की कोशिश की ......... संघ और भाजपा ने भी इसको सरहाया........ अन्यथा हर कोई जनता है........ की इसमें धोखा हिन्दुओं के साथ हुआ.......... पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर राष्ट्रीय शांति को तरहीज दी गयी......... और हिन्दू संघटन शांत रहे......... फिर भी मुस्लिम समुदाय सर्वोच्च न्यायलय तक गया......... और आप कहते हैं की संघ की सोच अमानवीय है......... और जहाँ तक मनु स्मृति का प्रश्न है............. शायद आपको शब्द पढने आते है........ भाव नहीं........... और हमारे सारे धर्म ग्रन्थ भाव से लिखे गए हैं........ शब्दों को समझने वाले इनको शायद न समझ सके........ वाल्मीकि जैसा डाकू......... राम राम न जपकर मरा मरा से ही संत हो जाता है............ क्योंकि वो शब्द नहीं भाव को समझ लेते हैं......... आप भी भावको समझने में सक्षम बन सकें.......... इसी प्रार्थना के साथ.........

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

आदरणीय लोक संघर्ष जी र.स.स. पर लिखने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी रखे आप ने लिखा है र.स.स की मनुवादी विचारधारा है और दलितों और महिलाओ के लिए अमानवीय दर्शन का वाहक है लेकिन सायद आप को पता नहीं आज १०० से अधिक सेवा प्रकल्प संघ द्वारा चलाये जा रहे है जिनमे वन्वाशी कल्याण आश्रम और दुर्गा वाहिनी ,सेवा भारती जैसे प्रमुख प्रकल्प सिर्फ महिलाओ और दलितों के उत्थान का ही काम करते है लाखो दलितों और महिलाओ को प्रसिक्षण देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम संघ के प्रचारक अपना घर बार छोड़ कर रहे है वही विद्या भारती के द्वारा देश भर के नौनिहालों को भारतीय सभ्यता और संस्कृति की सिक्षा देकर उनके भविष्य को सवार जा रहा है इसलिए किशी पर टिपण्णी करने से पहले पूरी जानकारी रखे आज संघ सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन ऐसे ही नहीं बनगया .

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat




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